गणेश उत्सव 2025: श्री गणेश स्थापना, पूजा नियम और व्रत का महत्व;-
भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भावनाओं और भक्ति का प्रतीक होते हैं। इन्हीं त्योहारों में से एक है गणेश उत्सव, जिसे पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, सुखकर्ता और बुद्धि के दाता कहा जाता है। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी के नाम से होती है, क्योंकि वे ही बाधाओं को दूर कर सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
गणेश उत्सव की शुरुआत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के समय सार्वजनिक रूप से की थी। तब से लेकर आज तक यह पर्व हर साल बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है।
गणेश उत्सव 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इसी दिन गणेश उत्सव की शुरुआत होती है और यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है।
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गणेश चतुर्थी 2025 तिथि प्रारंभ: 26 अगस्त 2025, सोमवार को सुबह 11:10 बजे से
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गणेश चतुर्थी तिथि समाप्ति: 27 अगस्त 2025, मंगलवार को सुबह 08:45 बजे तक
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गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त: 26 अगस्त को दोपहर 11:15 से 01:30 बजे तक उत्तम माना गया है।
👉 उदया तिथि के अनुसार, गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजन 26 अगस्त 2025, सोमवार को रखा जाएगा।
श्री गणेश स्थापना के नियम;
गणेश उत्सव की शुरुआत गणपति स्थापना से होती है। घर या पंडाल में गणेश जी की प्रतिमा लाने और स्थापित करने के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं:
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मूर्ति चयन – गणेश जी की प्रतिमा मिट्टी (शाडू माटी) की होनी चाहिए। पर्यावरण की दृष्टि से यह उत्तम मानी जाती है।
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दिशा – गणेश जी की प्रतिमा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में स्थापित करें।
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स्थान की शुद्धि – स्थापना से पहले घर की सफाई और गंगाजल से शुद्धिकरण करना आवश्यक है।
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प्रतिमा लाने का तरीका – गणेश जी की प्रतिमा को घर में प्रवेश कराते समय “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाएँ और शंख या घंटी बजाएँ।
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आसन – मूर्ति को लकड़ी के पाटे या चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर स्थापित करें।
गणेश पूजा के नियम व सामग्री;
गणपति पूजन में विशेष सामग्री और विधि का महत्व है।
आवश्यक सामग्री;
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लाल/पीला वस्त्र
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दूर्वा घास (21 तिनके)
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मोदक और लड्डू
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पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
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धूप, दीप, अगरबत्ती
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नारियल, सुपारी, पान
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रोली, अक्षत (चावल), कलश
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पुष्पमाला, फूल और पत्ते
पूजा विधि;
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गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर विराजित करें।
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कलश स्थापना करें और गणेश जी का आह्वान करें।
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भगवान गणेश को स्नान (अभिषेक) कराएँ – सबसे पहले पंचामृत से और फिर गंगाजल से।
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नए वस्त्र पहनाएँ और फूल, माला से सजाएँ।
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गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें।
व्रत का महत्व;
गणेश चतुर्थी का व्रत रखने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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धार्मिक महत्व – गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं।
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आध्यात्मिक महत्व – यह व्रत मन को शुद्ध करता है और भक्ति मार्ग को सरल बनाता है।
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पारिवारिक महत्व – परिवार में सुख, शांति और एकता बनी रहती है।
👉 जो भी श्रद्धालु पूरे नियम से यह व्रत करता है, उसके जीवन से विघ्न और कष्ट दूर हो जाते हैं।
गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय;
गणेश उत्सव में विशेष उपाय करने से व्यक्ति की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
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धन लाभ के लिए – गणेश जी को गुड़ और दूर्वा अर्पित करें।
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विद्या व बुद्धि के लिए – गणपति को मोदक और बेसन के लड्डू चढ़ाएँ।
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विवाह में आ रही बाधा दूर करने के लिए – गणेश जी को सिंदूर चढ़ाकर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
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व्यापार में सफलता हेतु – गणेश चतुर्थी पर घर या दुकान में स्वर्ण वर्म गणपति की पूजा करें।
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परिवार की शांति हेतु – रोज सुबह गणेश चालीसा और गणेश आरती करें।
गणेश जी की आरती
गणेश उत्सव में आरती का विशेष महत्व है। पूजा के अंत में “जय गणेश जय गणेश देवा…” आरती अवश्य करनी चाहिए। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हर कार्य सिद्ध होता है।
पर्यावरण-हितैषी गणेश उत्सव;
आजकल प्रदूषण की समस्या को देखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव मनाना सबसे श्रेष्ठ है।
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मिट्टी की प्रतिमा का ही चयन करें।
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घर पर छोटी प्रतिमा स्थापित करें और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें।
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विसर्जन के लिए घर में ही बाल्टी या टब का प्रयोग करें।
इससे न केवल धार्मिक महत्व बना रहेगा बल्कि प्रकृति भी सुरक्षित रहेगी।
निष्कर्ष;
गणेश उत्सव 2025 आस्था, भक्ति और उल्लास का पर्व है। इस दिन विधिपूर्वक गणेश स्थापना, पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियाँ, सफलता और समृद्धि का आगमन होता है। गणपति बप्पा को मोदक प्रिय हैं, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए मोदक अवश्य अर्पित करें।
आइए, इस बार गणेश उत्सव को श्रद्धा, भक्ति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के साथ मनाएँ और सब मिलकर गाएँ –
“गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!”
