गणेश जी की आरती
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहा जाता है। हर शुभ कार्य की शुरुआत गणपति बप्पा के नाम से होती है। गणेश जी की आरती करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और गणेश उत्सव पर आरती और पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
गणेश जी की आरती विधि
गणपति बप्पा कीआरती करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें। आरती से पहले दीपक, धूप, फूल और प्रसाद (मोदक या लड्डू) तैयार रखें। सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हुए दीपक और धूप अर्पित करें, फिर पुष्प और दूर्वा चढ़ाएँ। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर घंटी बजाते हुए और श्रद्धा भाव से गणेश जी की आरती करें। आरती के समय शंख या घंटा बजाना शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण पवित्र बनता है। आरती पूरी होने के बाद प्रसाद का वितरण करें और अंत में “गणपति बप्पा मोरया” का जयकारा लगाएँ।

गणेश उत्सव 2025: श्री गणेश स्थापना, पूजा नियम और व्रत का महत्व;-
🙏 श्री गणेश जी की आरती 🙏
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डूअन का भोग लगे, संत करें सेवा।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
गणेश जी की आरती करने से भक्त के जीवन से दुख, दरिद्रता और बाधाएँ दूर होती हैं। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान गणेश की कृपा सदैव बनी रहती है। इसलिए प्रतिदिन या कम से कम चतुर्थी के दिन आरती जरूर करनी चाहिए।
“गणेश जी की आरती को सुनने और गाने के लिए आप यह वीडियो देख सकते हैं:”
गणपति बप्पा मोरया! मंगल मूर्ति मोरया!
