Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion खत्म! सही तिथि, पारण और पूजा विधि एक जगह

Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion:- नवंबर 2025 में देवउठनी एकादशी और सोम प्रदोष व्रत के बीच तिथि को लेकर भक्तों में बड़ा भ्रम है — कोई 1 नवंबर को एकादशी बता रहा है तो कोई 2 नवंबर को। साथ ही 3 नवंबर को प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। ऐसे में सही दिन पर व्रत, पारण और पूजा कैसे करें, यही सवाल सबके मन में है। इस लेख में जानिए एकादशी और प्रदोष व्रत 2025 की सटीक तिथि, पारण का समय और पूजा विधि — सब कुछ एक जगह।

Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion खत्म!

हर साल की तरह इस बार भी Dev Uthani Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion कन्फ्यूजन बना हुआ है। कोई कहता है कि एकादशी 1 नवंबर को है, तो कोई बताता है 2 नवंबर को। वहीं, 3 नवंबर को सोम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है, जिससे भक्तों के मन में सवाल उठता है — जब एक व्रत तोड़ा जाएगा, तभी दूसरा कैसे रखा जाए?
ऐसे में कौन-सी तारीख सही है? एकादशी कब रखनी चाहिए और पारण कब करना उचित रहेगा?

शास्त्रों के अनुसार व्रत हमेशा सूर्योदय की तिथि के आधार पर किया जाता है। जब एकादशी और द्वादशी तिथि के बीच समय का अंतर कम होता है, तब यही उलझन पैदा होती है कि किस दिन व्रत रखा जाए। यही कारण है कि कुछ पंचांगों में एकादशी 1 नवंबर तो कुछ में 2 नवंबर बताई जा रही है।

वास्तविक रूप से 2025 में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह 2 नवंबर (रविवार) को मनाए जाएंगे, जबकि 3 नवंबर (सोमवार) को सोम प्रदोष व्रत रहेगा। इस दिन भक्त एकादशी पारण के बाद भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

इस लेख में हम आपके लिए लाए हैं — एकादशी और प्रदोष व्रत 2025 की सही तिथि, पारण का समय, पूजा विधि और दोनों व्रतों का धार्मिक महत्व, ताकि आपके सभी संदेह दूर हो जाएं और आप सही विधि से व्रत कर सकें।

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Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion:- Ekadashi aur Pradosh Vrat 2025 Muhurat


🗓️ 1 से 3 नवंबर 2025 की तिथि सारणी

दिनांक तिथि तिथि प्रारंभ–समाप्ति समय पर्व / व्रत
1 नवंबर 2025 (शनिवार) दशमी → एकादशी दशमी समाप्त – दोपहर 1:58 बजे
एकादशी आरंभ – दोपहर 1:58 से
2 नवंबर 2025 (रविवार) एकादशी तिथि एकादशी सूर्य उदय पर विद्यमान
समाप्त – 2 नवंबर दोपहर 11:35 बजे
देवउठनी एकादशी + तुलसी विवाह
3 नवंबर 2025 (सोमवार) द्वादशी → त्रयोदशी द्वादशी प्रातः तक
त्रयोदशी आरंभ – सुबह 11:35 से
एकादशी पारण + सोम प्रदोष व्रत

देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि शनिवार, 1 नवंबर की दोपहर 1:58 बजे से प्रारंभ होकर रविवार, 2 नवंबर की दोपहर 11:35 बजे तक रहेगी। चूंकि 2 नवंबर के सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए व्रत इसी दिन रखना शास्त्रसम्मत माना गया है। भक्तजन 1 नवंबर की रात से अन्न का त्याग कर 2 नवंबर को पूरे दिन उपवास, भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी विवाह कर सकते हैं।

व्रत के पारण (तोड़ने) का समय 3 नवंबर 2025, सोमवार की सुबह 8:00 से 9:30 बजे के बीच सबसे शुभ रहेगा, क्योंकि उस समय द्वादशी तिथि विद्यमान होगी। उसी दिन दोपहर के बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी, जिससे सोम प्रदोष व्रत का शुभ अवसर प्राप्त होगा। प्रदोष काल में यानी शाम 4:30 से 7:00 बजे के बीच भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी रहेगा। इस प्रकार 2 नवंबर को एकादशी और 3 नवंबर को प्रदोष व्रत करने से विष्णु व शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के पाप व कष्ट दूर होते हैं।

Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion:-धार्मिक महत्व और लाभ (Spiritual Significance & Benefits)

देवउठनी एकादशी का संबंध स्वयं भगवान विष्णु से है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और पुनः सृष्टि के कार्य आरंभ करते हैं। इसी कारण इसे हरि-प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन उपवास, दीपदान, तुलसी विवाह और विष्णु नाम-स्मरण से जीवन में सौभाग्य, धन, वैवाहिक सुख और संतान-सुख की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति श्रद्धा से इस व्रत को करता है, उसके सारे पाप नष्ट होकर मोक्ष मार्ग प्रशस्त होते हैं।

दूसरी ओर, प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। जब यह व्रत सोमवार के दिन आता है, तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद तक) में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और दीप अर्पित करने से मनोवांछित फल मिलता है। कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना करता है, वह धन, संतोष, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्राप्त करता है।

इस प्रकार 2025 में 2 और 3 नवंबर के लगातार व्रत रखने से भक्तों को द्विगुण फल प्राप्त होगा — विष्णु कृपा से जीवन में समृद्धि और शिव कृपा से सभी संकटों से मुक्ति।

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Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion:-क्या करें,क्या न करें?

🌿 क्या करें (Do’s)

✅ 1 नवंबर की रात से अनाज त्यागें।
✅ 2 नवंबर को पूर्ण उपवास करें।
✅ 2 नवंबर को भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी विवाह और दीपदान करें।
✅ 3 नवंबर की सुबह 8:00–9:30 बजे के बीच एकादशी पारण करें।
✅ 3 नवंबर को दोपहर के बाद संकल्प लेकर प्रदोष व्रत करें।
✅ प्रदोष काल में शाम 4:30–7:00 बजे भगवान शिव की पूजा करें।


🚫 क्या न करें (Don’ts)

❌ एकादशी के दिन अन्न, दाल, चावल, गेहूं, प्याज, लहसुन का सेवन न करें।
❌ व्रत के दौरान गुस्सा, झूठ, निंदा और विवाद से दूर रहें।
❌ तुलसी विवाह के दिन शाम के बाद विवाह या अन्य धार्मिक कार्य न करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

Ekadashi-Pradosh Vrat 2025 Confusion को लेकर लोगों के मन में जो दुविधा थी — इस लेख में उसे दूर करने का प्रयास किया गया है। पंचांगों के अनुसार, एकादशी व्रत 1 नवंबर 2025 को रखा जाएगा और पारण 2 नवंबर को किया जाएगा। वहीं प्रदोष व्रत 3 नवंबर 2025 को रहेगा।

अगर आप भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों के भक्त हैं, तो इस बार आपको व्रतों के क्रम का पालन सही विधि से करना होगा — पहले एकादशी व्रत रखें, पारण के बाद अगले दिन प्रदोष व्रत करें।

इस तरह आप दोनों व्रतों का पूर्ण फल प्राप्त करेंगे और आपके सभी धार्मिक कार्य शुभ फल देंगे।

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FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. देवउठनी एकादशी 2025 कब है?
A: 2 नवंबर 2025 (रविवार) को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी।

Q2. एकादशी व्रत कब रखें?
A: 1 नवंबर की रात से अन्न का त्याग कर 2 नवंबर को पूरे दिन उपवास रखें।

Q3. एकादशी पारण का शुभ समय कब है?
A: 3 नवंबर 2025 की सुबह 8:00–9:30 बजे के बीच।

Q4. प्रदोष व्रत कब करें?
A: 3 नवंबर 2025 (सोमवार) को शाम 4:30–7:00 बजे के बीच।

Q5. एकादशी और प्रदोष व्रत एक साथ करने में कोई समस्या होगी?
A: नहीं। एकादशी पारण के बाद श्रद्धा और विधि से प्रदोष व्रत किया जा सकता है।

Q6. तुलसी विवाह 2025 कब है?
A: 2 नवंबर 2025 को।

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