Holika Dahan 2026: पौराणिक कथा, सही तिथि, पूजा विधि और चमत्कारी उपाय
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का पावन पर्व है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास की शक्ति से हर संकट को हराया जा सकता है। होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह पर्व नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर जीवन में नई सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक भावना से जुड़ा उत्सव है।
होलिका दहन की अग्नि हमारे जीवन के भय, रोग, शत्रु बाधा और मानसिक तनाव को प्रतीकात्मक रूप से समाप्त करने का संकेत देती है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने वाला व्यक्ति अंततः विजयी होता है।
इस पर्व की जड़ें भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ी हैं। हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। अंततः भगवान की कृपा से प्रह्लाद की रक्षा हुई और होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई।
तभी से हर वर्ष होलिका दहन मनाकर यह संदेश दिया जाता है कि अहंकार का अंत निश्चित है और सच्ची श्रद्धा की विजय होती है।
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Holika Dahan 2026: सही तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में तिथियों को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन देखी जा रही है, क्योंकि इस बार पूर्णिमा के आसपास चंद्रग्रहण भी पड़ रहा है। इसलिए सही जानकारी जानना बेहद जरूरी है। होलिका दहन 2026 2 मार्च 2026 (सोमवार) की शाम को किया जाएगा। इस दिन सूर्यास्त के बाद और भद्रा काल समाप्त होने पर होलिका दहन करना शुभ रहेगा।
3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्रग्रहण रहेगा। ग्रहण काल में शुभ कार्य, पूजा-पाठ और उत्सव करना उचित नहीं माना जाता। इसी कारण रंगों वाली होली (धुलेंडी) 4 मार्च 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।
Holika Dahan 2026 संभावित शुभ मुहूर्त
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पूर्णिमा तिथि – 2 मार्च को विद्यमान
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दहन का श्रेष्ठ समय – सूर्यास्त के बाद
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विशेष ध्यान – भद्रा काल में दहन न करें
(स्थानीय स्थान के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से एक बार पुष्टि अवश्य करें।)
Holika Dahan 2026: पूजा विधि और चमत्कारी उपाय
होलिका दहन की रात को की गई साधना और उपाय अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन की अग्नि नकारात्मक शक्तियों को भस्म कर देती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है।
1. धन वृद्धि के लिए उपाय
होलिका दहन की अग्नि में 7 साबुत लौंग, 7 काली मिर्च और थोड़ा सा गुड़ अर्पित करें।
इसके बाद माता लक्ष्मी से प्रार्थना करें।
मान्यता है कि इससे आर्थिक रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
2. नजर दोष और ऊपरी बाधा से बचाव
एक सूखा नारियल लें, उसे अपने ऊपर से 7 बार उतारकर होलिका की अग्नि में डाल दें।
यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर को दूर करने के लिए किया जाता है।
3. परिवार में शांति के लिए
होलिका की अग्नि की राख (अगले दिन ठंडी होने पर) घर लाकर मुख्य द्वार पर हल्का सा तिलक करें।
मान्यता है कि इससे घर में कलह कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
4. संतान सुख और उन्नति के लिए
होलिका की 7 परिक्रमा करें और मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण करें।
भक्त प्रह्लाद की भक्ति को याद करते हुए संतान की रक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।
5. दांपत्य जीवन में मधुरता के लिए
पति-पत्नी साथ में होलिका की परिक्रमा करें और अग्नि में थोड़ी सी हल्दी और गुड़ अर्पित करें।
इससे आपसी मतभेद कम होने की मान्यता है।
6. मानसिक शांति और भय से मुक्ति
होलिका दहन के समय 11 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
यह मंत्र मन को स्थिर और सकारात्मक बनाता है।
विशेष सावधानी
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भद्रा काल में दहन न करें।
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अग्नि में प्लास्टिक या हानिकारक वस्तुएं न डालें।
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केवल शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें।
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होलिका दहन की पौराणिक कथा
होलिका दहन की कथा सत्य, भक्ति और विश्वास की अमर गाथा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि ईश्वर पर अटूट श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता।
बहुत समय पहले एक असुर राजा था — हिरण्यकश्यप। वह अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी था। कठोर तपस्या के बल पर उसने वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई देवता, मानव या पशु आसानी से मार न सके। इस वरदान के कारण वह स्वयं को भगवान समझने लगा और पूरे राज्य में आदेश दे दिया कि उसकी ही पूजा की जाए।
लेकिन उसके पुत्र प्रह्लाद का हृदय बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्ति में लीन था। प्रह्लाद दिन-रात विष्णु नाम का जाप करता था।
यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल सहन नहीं हुई। उसने प्रह्लाद को समझाने की बहुत कोशिश की, पर जब वह नहीं माना तो उसने उसे दंड देने का निश्चय किया।

राजा ने कई बार प्रह्लाद को मारने की योजना बनाई —
उसे ऊँचाई से गिराया गया, विष दिया गया, हाथियों के पैरों तले कुचलवाने की कोशिश की गई — लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गया।
अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। योजना बनाई गई कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठेगी, जिससे प्रह्लाद जल जाएगा और होलिका सुरक्षित बाहर आ जाएगी।
लेकिन हुआ कुछ और ही…
जब अग्नि प्रज्वलित हुई, तब प्रह्लाद भगवान का नाम जपते रहे। उनकी सच्ची भक्ति के सामने होलिका का वरदान निष्फल हो गया। अग्नि में होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए।
यह घटना यह सिद्ध करती है कि
✨ अहंकार का अंत निश्चित है।
✨ भक्ति और सत्य की सदैव विजय होती है।
तभी से हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को होलिका दहन किया जाता है, ताकि हम अपने भीतर के अहंकार, द्वेष और नकारात्मकता को अग्नि में समर्पित कर सकें।
Holika Dahan 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1️⃣ होलिका दहन 2026 कब है?
साल 2026 में होलिका दहन 2 मार्च (सोमवार) को किया जाएगा। सूर्यास्त के बाद और भद्रा काल समाप्त होने पर दहन करना शुभ माना जाता है।
2️⃣ 2026 में होली 3 मार्च को क्यों नहीं मनाई जाएगी?
3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्रग्रहण लग रहा है। ग्रहण काल में शुभ कार्य और उत्सव करना उचित नहीं माना जाता, इसलिए रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।
3️⃣ होलिका दहन भद्रा काल में क्यों नहीं किया जाता?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा काल में किए गए शुभ कार्य बाधा या अशुभ फल दे सकते हैं। इसलिए होलिका दहन हमेशा भद्रा समाप्त होने के बाद किया जाता है।
4️⃣ होलिका दहन की अग्नि का क्या महत्व है?
होलिका की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा, रोग, भय और बाधाओं को समाप्त करने का प्रतीक मानी जाती है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है।
5️⃣ होलिका दहन की कथा किससे जुड़ी है?
यह कथा भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप से संबंधित है, जिसमें भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद की रक्षा होती है और अधर्म का नाश होता है।
6️⃣ होलिका दहन के दिन कौन से उपाय किए जा सकते हैं?
इस दिन धन वृद्धि, नजर दोष से बचाव, पारिवारिक शांति और मानसिक सुख के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं, जैसे अग्नि में गुड़, लौंग या सरसों अर्पित करना और परिक्रमा करना।
7️⃣ क्या होलिका दहन की राख घर लाना शुभ है?
हाँ, मान्यता है कि अग्नि की ठंडी राख को घर लाकर मुख्य द्वार पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
8️⃣ होलिका दहन और होली में क्या अंतर है?
होलिका दहन बुराई के दहन का प्रतीक है और होली (धुलेंडी) अगले दिन रंगों के उत्सव के रूप में मनाई जाती है।
