Kartik Purnima: इस दिन करें माता तुलसी की विदाई, मिलेगा वैवाहिक सुख और भगवान विष्णु का आशीर्वाद

Kartik Purnima: कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी माता की विदाई का विशेष महत्व होता है। देवउठनी एकादशी से शुरू हुआ तुलसी विवाह इसी दिन संपन्न होता है। तुलसी माता की ससम्मान विदाई करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में वैवाहिक सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। यह दिन भक्ति और आभार का प्रतीक माना जाता है।

 

Kartik Purnima को न केवल देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है, बल्कि यह तुलसी विवाह के समापन का भी पावन दिन है।
इस दिन तुलसी माता की विधिवत विदाई की जाती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु और तुलसी माता के पवित्र मिलन के बाद तुलसी माता को ससम्मान विदा करने से घर में पवित्रता, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
इस दिन तुलसी माता के समक्ष दीपक जलाना, पुष्प चढ़ाना, भगवान विष्णु की आरती और तुलसी स्तुति करने से वैवाहिक जीवन में स्थिरता और प्रेम बढ़ता है।
कहा गया है कि तुलसी माता की विदाई के समय “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर अपने भक्तों को धन, सौभाग्य और सुखमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

Kartik Purnima:माता तुलसी विदाई मुहूर्त (Kartik Purnima 2025 Tulsi Mata Vidai Muhurat)

तिथि: रविवार, 5 नवंबर 2025 (Kartik Purnima)
🌕 पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर 2025, रात 06:15 बजे
🌕 पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 नवंबर 2025, शाम 04:25 बजे

इस दिन प्रातःकाल सूर्योदय के बाद से लेकर शाम के सूर्यास्त तक तुलसी माता की विदाई करना अत्यंत शुभ माना गया है।
सुबह गंगा स्नान या घर पर स्नान करके, तुलसी माता को पुष्प, दीपक, सुहाग सामग्री और मिठाई अर्पित करें।
फिर भगवान विष्णु और तुलसी माता का संकल्पपूर्वक पूजन कर “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र के साथ माता की विदाई करें।

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धार्मिक मान्यता

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी माता की ससम्मान विदाई करने से घर में वैवाहिक सुख, सौभाग्य, और धन-समृद्धि बनी रहती है।
यह दिन तुलसी विवाह के समापन का प्रतीक है और माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और देवी तुलसी की कृपा से जीवन से सभी नकारात्मकता दूर होकर positive energy का संचार होता है।

Kartik Purnima: Tulsi Mata Vidai Puja Vidhi (माता तुलसी विदाई पूजा विधि)

 1. स्नान और संकल्प:
कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान करके, साफ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और माता तुलसी के समक्ष दीपक जलाएँ और “आज मैं श्रद्धा से तुलसी माता की विदाई कर रही/रहा हूँ” — यह संकल्प लें।

 2. तुलसी माता की पूजा करें:
तुलसी माता के समक्ष जल, फूल, अक्षत (चावल), रोली, चंदन और मिठाई अर्पित करें।
फिर तुलसी माता को सिंदूर, चुनरी, और सुहाग सामग्री अर्पित करें — यह उनके विवाह समापन की परंपरा मानी जाती है।

 3. भगवान विष्णु (शालिग्राम) की आराधना:
भगवान विष्णु को तुलसी पत्र, पीले पुष्प और भोग लगाएँ।
फिर तुलसी माता के साथ भगवान विष्णु की आरती करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।

 4. तुलसी माता की ससम्मान विदाई:
तुलसी माता के चारों ओर तीन बार परिक्रमा करें।
फिर तुलसी माता के गमले में पुष्प, जल, और दीप अर्पित करते हुए कहें —

“माता तुलसी, आपने हमारे घर को पवित्रता, शांति और समृद्धि दी।
आपकी कृपा सदा हम पर बनी रहे।”

इसके बाद तुलसी माता को हल्का जल अर्पित कर दीपक जलाएँ — यह विदाई का प्रतीक दीपदान होता है।

 5. आरती और प्रसाद वितरण:
अब तुलसी माता की आरती करें —

“जय तुलसी माता जय जय तुलसी देवी…”
आरती के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रसाद बाँटें और भगवान विष्णु को धन्यवाद दें

Kartik Purnima: माता तुलसी विदाई के लाभ (Spiritual & Life Benefits of Tulsi Mata Vidai)

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी माता की ससम्मान विदाई करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और समृद्धि को आमंत्रित करने का शक्तिशाली उपाय है।
इस दिन तुलसी माता को पूजा और विदाई करने से जीवन में कई दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं 👇

1. वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता आती है

माता तुलसी को विवाह और सौभाग्य की देवी कहा गया है। विदाई के दिन उनकी पूजा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बढ़ती है।
यदि वैवाहिक जीवन में मनमुटाव या दूरी है, तो यह पूजा उन सभी नकारात्मक भावनाओं को दूर करती है और रिश्तों में नई ऊर्जा और अपनापन लाती है।

2. विवाह में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं

जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में देरी या रुकावट होती है, उनके लिए तुलसी माता की विदाई अत्यंत शुभ मानी गई है।
तुलसी माता की कृपा से विवाह योग सशक्त होता है और शीघ्र ही योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

3. घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है

तुलसी माता को घर की रक्षा करने वाली देवी माना गया है। विदाई के दिन दीपदान और पुष्प अर्पण करने से घर के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा और तनाव दूर होते हैं।
इससे घर में आध्यात्मिक शांति, मानसिक सुकून और सकारात्मकता बनी रहती है।

4. धन-लक्ष्मी और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है

भगवान विष्णु और तुलसी माता दोनों ही धन और समृद्धि के प्रतीक हैं।
इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है और परिवार में धन की वृद्धि होती है।
कहा गया है — “जहाँ तुलसी माता विराजती हैं, वहाँ लक्ष्मी माता सदा निवास करती हैं।”


5. पाप नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है

कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी माता की विदाई करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अनेक जन्मों के पुण्य का फल मिलता है।
यह कर्म को शुद्ध करने और आत्मा को पवित्र बनाने का सर्वोत्तम अवसर माना गया है।

6. जीवन में विष्णु कृपा और आध्यात्मिक उन्नति

जो भक्त श्रद्धा से तुलसी माता और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा सदैव प्राप्त होती है।
उनके जीवन में शांति, ज्ञान, और आध्यात्मिक विकास के नए मार्ग खुलते हैं।

7. परिवार में सौभाग्य और मंगल की वृद्धि

तुलसी माता की विदाई के समय जब पूरा परिवार पूजा में सम्मिलित होता है, तो वह एक सांस्कृतिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक बनता है।
इससे परिवार में सौभाग्य, सद्भाव और आपसी प्रेम की वृद्धि होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

कार्तिक पूर्णिमा का दिन केवल दान-पुण्य या पूजन का अवसर नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि और जीवन में नई ऊर्जा भरने का भी समय है। इस दिन माता तुलसी की विधिवत विदाई और भगवान विष्णु का पूजन करने से व्यक्ति को सुखी वैवाहिक जीवन, समृद्धि, और देव कृपा प्राप्त होती है।
जो भी भक्त इस दिन श्रद्धा और भक्ति से दीपदान, गंगा स्नान, और तुलसी विवाह व विदाई का अनुष्ठान करते हैं, उनके जीवन में न केवल नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है बल्कि Positive Vibes, Peace, और Prosperity का वास होता है।
इसलिए, कार्तिक पूर्णिमा का व्रत और पूजन हर व्यक्ति के लिए जीवन में शुभता, सौभाग्य, और आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग खोलता है।

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