Margashirsha Amavasya 2025: इस दिन करें पितृ तर्पण और दीपदान, दूर होगी Negativity और आएगी Peace व Prosperity
Margashirsha Amavasya 2025: मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 इस वर्ष 26 नवंबर को मनाई जाएगी। यह अमावस्या पितृ शांति, घर से नकारात्मक ऊर्जा के हटने और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाली मानी जाती है। इस दिन दीपदान, तर्पण, श्राद्ध, दान और प्रार्थना करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, घर में शांति, प्रेम और Prosperity का प्रवाह बढ़ता है। कहा जाता है कि इस तिथि पर किया गया छोटा सा पुण्य कर्म भी कई गुना फल देता है।
इसे और पढ़ें:- Utpanna Ekadashi 2025 :उत्पन्ना एकादशी कब है? 16 या 15 नवंबर? यहां जानें complete पूजा विधि, व्रत कथा,महत्व और नियम
Margashirsha Amavasya 2025: हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखने वाली मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पितरों की आत्माएँ धरती लोक के क़रीब रहती हैं, इसलिए इस दिन तर्पण, दीपदान और पितृ स्मरण करने से उन्हें शांति प्राप्त होती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में पितृ प्रसन्न रहते हैं, वहाँ रोग, क्लेश, गरीबी और नकारात्मक ऊर्जा स्थायी नहीं रहती। इस दिन किया गया साधारण दीपदान भी घर में Peace, Positive Aura और Prosperity बढ़ाने वाला माना गया है।
इसके अलावा यह अमावस्या भैरव, शिव, कृष्ण, माँ लक्ष्मी और पितृ देवताओं की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। इस दिन किसी नदी, तालाब या घर के मंदिर में दीपक जलाकर उन्हें समर्पित करने से पुराने दोष, बाधाएँ और दुर्भाग्य का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।
मार्गशीर्ष अमावस्या को दया, सत्संग, ब्रह्मचर्य, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन लोग विशेष रूप से तिल, जल, काला वस्त्र, कंबल, भोजन और दीपदान करके पितरों की शांति और अपनी उन्नति की कामना करते हैं।
कहावत है:
“पितृ प्रसन्न तो देव प्रसन्न, और देव प्रसन्न तो जीवन धन्य।”
इसी भाव से यह अमावस्या न सिर्फ़ एक पूजा का दिन है, बल्कि परिवार, वंश और आत्मिक संतुलन को मजबूत करने का अवसर है।
इसे और पढ़ें:- Pradosh Vrat 2025: नवंबर में सोम प्रदोष व्रत कब हैं? जानें तिथि, महत्व और complete पूजा विधि जो दूर करे negativity और लाए positivity
Margashirsha Amavasya 2025:: तिथि और शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 इस वर्ष 20 नवंबर 2025, गुरुवार के दिन पड़ रही है।
इस दिन चंद्रमा पूरी तरह अमावस्था में होता है, इसलिए यह तिथि पितृ तर्पण, दीपदान, श्राद्ध कर्म और लक्ष्मी-शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है।
• अमावस्या तिथि आरंभ: 19 नवंबर 2025 को रात लगभग 08:14 बजे
• अमावस्या तिथि समाप्त: 20 नवंबर 2025 को शाम लगभग 06:02 बजे
इसलिए पूजा, दान और तर्पण का सबसे शुभ समय 20 नवंबर को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा।
शुभ समय (पूजा और दीपदान के लिए विशेष):- पितृ तर्पण, जल अर्पण सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक, शिव-भैरव-लक्ष्मी पूजा दोपहर 12 बजे से सूर्यास्त तक, दीपदान (घर/पीपल/तट/मंदिर) सूर्यास्त के बाद 1 से 2 घंटे।
इस दिन क्या खास होता है?:-
• पितृ लोक और धरती लोक के बीच का द्वार सूक्ष्म रूप से सक्रिय रहता है
• पितरों के लिए किया गया अर्पण तुरंत फल देता है
• नकारात्मक ऊर्जा जल्दी नष्ट होती है
• घर में मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है
Margashirsha Amavasya 2025 पूजा विधि (घर पर भी आसानी से)
1: सुबह जल्दी उठें
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठें।
नहा-धोकर साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें।
यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।
2: घर की सफाई और धूप-दीप
घुमटी, धूपबत्ती, कपूर या गूगल जलाकर पूरे घर में घुमाएं।
इससे घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
3: पूजा स्थान तैयार करें
पूजा के लिए एक साफ जगह पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
उस पर
• भगवान श्रीकृष्ण या नारायण की तस्वीर/मूर्ति
• तुलसी का छोटा पौधा (हो तो बेहतर)
• एक दीपक (तेल या घी)
रखें।
4: दीपक और अगरबत्ती जलाएं
पहले भगवान को प्रणाम करें और दीपक जलाएं।
अगरबत्ती या धूप जला दें।
5: संकल्प लें
अपने मन में या हल्की आवाज में बोलिए:
“मैं (अपना नाम), अपने पितरों और भगवान की कृपा के लिए यह पूजा कर रही/रहा हूँ। मेरे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।”
6: पितृ तर्पण करें
तर्पण करने के लिए एक कटोरे में स्वच्छ पानी, काले तिल और थोड़ा सा दूध मिलाएं।
फिर दोनों हाथों से धीरे-धीरे जल बहाते हुए बोलें:
“ओम् पितृभ्यो नमः, पितामहभ्यो नमः, प्रपितामहभ्यो नमः।”
यह 3 या 7 बार कर सकते हैं।
7: भगवान को भोग लगाएं
थोड़ा सा फल, गुड़, बताशा, चावल या जो भी घर में सादा भोग हो, वह रख दें।
भोग करने के समय मन शांत रखें।
8: मंत्र जप
यदि समय कम है तो सिर्फ यही मंत्र 108 बार बोलें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
यह मन को तुरंत शांत करता है।
अगर बेटी/बच्चे के लिए सुरक्षा चाहते हों, तो यह मंत्र 11 बार बोलें:
“ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः”
9: शाम को दीपदान
संध्या समय (शाम) घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक जलाएं।
और एक दीपक तुलसी के पास रखें।
अगर घर में तुलसी नहीं है, तो बालकनी/मुख्य दरवाजे के पास रख दें।
दीपक रखते समय मन में कहें:
“घर से सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर हों और शांति स्थापित हो।”
10: दान करें
आज के दिन चाहे थोड़ा ही क्यों न हो, कोई दान अवश्य करें:
• काले तिल
• चावल
• भोजन
• कोई कपड़ा
दान से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
इसे और पढ़ें:- magh ganesh chaturthi 2026: तिलकुटा (माघ) गणेश चतुर्थी पूजा कैसे करें? पूरी विधि और नियम
Margashirsha Amavasya 2025:-पितृ तर्पण विधि और दीपदान विधि
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें। घर के शांत स्थान या आंगन में एक कटोरी में साफ जल भरें, उसमें थोड़ा काला तिल, चावल और एक-एक बूंद दूध मिलाएँ। अब पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर बैठकर अपने पितरों का स्मरण करें और मन में प्रार्थना करें कि वे सुख और शांति को प्राप्त हों। इसके बाद दोनों हाथों से धीरे-धीरे जल को धरती पर अर्पित करें और कहें “पितृदेवता प्रसन्न हों।” यह प्रक्रिया भाव और श्रद्धा के साथ करने पर पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तर्पण करते समय किसी तरह की शिकायत या दुख न रखें, बस प्रेम और सम्मान के भाव से पितरों को याद करें।
दीपदान विधि (संध्या समय करने वाला मुख्य उपाय)
दीपदान का मतलब है — दीप जलाकर घर, मन और वातावरण से अंधकार और नकारात्मकता दूर करना।
अमावस्या की रात दीपदान करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। सूर्यास्त के बाद घर की साफ-सफाई कर एक छोटा-सा दिया घी या तिल के तेल से भरें और रूई की बत्ती लगाएँ। अब इस दीपक को घर के मुख्य द्वार, बालकनी, या तुलसी के पास जलाएँ। यदि नदी, तालाब या किसी प्राकृतिक जल स्रोत तक पहुंच हो, तो वहाँ भी दीपदान किया जा सकता है। धीरे-धीरे दीपक को जल में प्रवाहित करते हुए मन में कहें “सर्वत्र प्रकाश, शांति और समृद्धि आए।” कहा जाता है कि दीपदान से जीवन की अंधकारमय परिस्थितियाँ दूर होती हैं, मानसिक तनाव कम होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह साधारण-सी परंतु अत्यंत प्रभावी विधि घर में शांति, स्थिरता और लक्ष्मी कृपा लाती है।
इस दिन क्या न करें (Important Precautions)
1. मांस, अंडा, शराब और नशे वाली चीज़ों का सेवन न करें।
2. किसी की बुराई, ताना या गुस्सा करने से बचें।
3. झूठ, छल या वाद-विवाद न करें।
4. खाने में अति तीखा, खट्टा या तला हुआ कम रखें।
5. जमीन पर झाड़ू चलाने से बचें (शाम के बाद तो बिल्कुल नहीं), इससे पितरों के सूक्ष्म स्वरूप को कष्ट माना जाता है।
6. बिना श्रृद्धा के केवल दिखावे के लिए पूजा न करें।
7. पानी, अनाज या कपड़े व्यर्थ न बहाएँ।
8. यदि आपके घर में तुलसी है, तो इस दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना वर्जित है।
दीपदान और पितृ तर्पण के फायदे (Benefits)
1. पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे आशीर्वाद देते हैं।
2. परिवार में कलह, तनाव और मानसिक भारीपन कम होता है।
3. घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, नकारात्मकता खत्म होती है।
4. करियर, नौकरी और व्यवसाय में रुके हुए काम आगे बढ़ने लगते हैं।
5. व्यक्ति के मन में स्थिरता, शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
6. धन से जुड़े अचानक लाभ और अवसर मिलने लगते हैं।
7. घर की बीमारियाँ, परेशानी और मन-मुटाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं।
मार्गशीर्ष अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश और शांति लाने का अवसर है। बस मन में श्रद्धा, विनम्रता और भक्ति रखें। पितरों का आशीर्वाद अनमोल होता है।
ऐसी सरल, सच्ची और जीवन में काम आने वाली धार्मिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।
