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Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधि, मंत्र और आरती का महत्व”

Shardiya Navratri 2025:; आइए जानते हैं नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधि, मंत्र, आरती और महत्व…
Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधि, मंत्र और आरती का महत्व
Shardiya Navratri 2025

Shardiya Navratri 2025: साल का सबसे बड़ा और खास पर्व माना जाता है। यह आश्विन मास में आता है और पूरे नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इसे शक्ति की उपासना का पर्व कहा जाता है, जहाँ भक्त माँ से सुख, शांति और शक्ति की कामना करते हैं।

इन नौ दिनों को बहुत पवित्र माना गया है। भक्त व्रत रखते हैं, माँ दुर्गा का विशेष पूजन करते हैं और भजन-कीर्तन से वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। इस समय घर-घर में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन जैसी परंपराएँ निभाई जाती हैं।

शारदीय नवरात्रि का महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत होती है। यही कारण है कि नवरात्रि के बाद विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है, जो भगवान राम की रावण पर जीत का प्रतीक है।

माना जाता है कि शारदीय नवरात्रि में श्रद्धा और नियम से पूजा करने पर माँ दुर्गा हर दुख-दर्द दूर करती हैं और जीवन में सुख, शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।


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Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के नौ रूपों की आरती

पहला दिन – मां शैलपुत्री का मंत्र

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप विशेष रूप से शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। माना जाता है कि Shardiya Navratri 2025  इस मंत्र से साधक को शक्ति, शांति और स्थिरता की प्राप्ति होती है।

मंत्र:
🔸 ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

इस मंत्र के जाप से साधक को शक्ति, स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

मां शैलपुत्री की आरती

जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री।
पर्वतराज सुत माता, जय जय शैलपुत्री॥

चन्द्रमौली मस्तक पर, शोभित शशांक।
कर में त्रिशूल विराजे, वरद अभय का अंक॥
जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री॥

सिंहासन विराजे, महाशक्ति दायिनी।
भक्तों की रक्षा करतीं, त्रैलोक्य पालनिनी॥
जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री॥

सुख-शांति दायिनी, ज्ञान प्रकाशिनी।
दुःख-दारिद्र्य विनाशिनी, आनंदमयी भवानी॥
जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री॥

पर्वतराज की बेटी, महिमा अपार।
भक्त जनों के संकट हरतीं, करती उद्धार॥
जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री॥

जो जन शरण में आए, मां का नाम गाए।
सकल मनोरथ पूरे, सुख-समृद्धि पाए॥
जय शैलपुत्री माता, जय जय शैलपुत्री॥

दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। यह तप, संयम और साधना की देवी मानी जाती हैं।पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

इस मंत्र का जाप करने से साधक के जीवन में आत्मविश्वास, धैर्य और तपस्या की शक्ति आती है। विद्यार्थी और साधक के लिए यह विशेष लाभकारी है।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय ब्रह्मचारिणी माता, जय ब्रह्मचारिणी।
तप-तपस्या की मूर्ति, शुभफल दायिनी॥

हाथ में कमंडलु शोभित, माला भी हाथ में।
भक्तों को वर देतीं, रहतीं हर साथ में॥
जय ब्रह्मचारिणी माता, जय ब्रह्मचारिणी॥

सादगी का रूप तेरा, सबसे निराला।
भक्त जो करे ध्यान तेरा, उसका जीवन उजाला॥
जय ब्रह्मचारिणी माता, जय ब्रह्मचारिणी॥

तप और संयम सिखाती, देतीं ज्ञान अपार।
तेरी पूजा से मिटते, सब संकट और विकार॥
जय ब्रह्मचारिणी माता, जय ब्रह्मचारिणी॥

भक्तों की मनोकामना, तू ही पूरी करती।
श्रद्धा से जो तुझे पुकारे, उसकी नैया पार उतारती॥
जय ब्रह्मचारिणी माता, जय ब्रह्मचारिणी॥


तीसरे दिन – मां चंद्रघंटा का मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित रहता है और इनके गले में घंटी के समान स्वर बजता है, इसी कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः

इस मंत्र का जाप करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं का नाश होता है। साधक को शांति, साहस और सफलता की प्राप्ति होती है।

मां चंद्रघंटा की आरती

जय चंद्रघंटा माता, जय जय चंद्रघंटा।
शुभ स्वरूपणी माता, जय जय चंद्रघंटा॥

सिंह पर सवार हो, करतीं असुर संहार।
भक्तों के दुःख हरतीं, करतीं कल्याण अपार॥
जय चंद्रघंटा माता, जय जय चंद्रघंटा॥

माथे पर अर्धचंद्र, बजतीं घंटे की ध्वनि।
भक्त जो तेरा ध्यान करें, मिटे जीवन की व्यथा सभी॥
जय चंद्रघंटा माता, जय जय चंद्रघंटा॥

सिंह गर्जना जैसी, तेरा है रूप कठोर।
तेरी कृपा से भक्त पावें, जीवन में सुख की डोर॥
जय चंद्रघंटा माता, जय जय चंद्रघंटा॥

शत्रु हों या बाधाएँ, सब दूर भगातीं।
सच्चे मन से जो पुकारे, उसे गले लगातीं॥
जय चंद्रघंटा माता, जय जय चंद्रघंटा॥


चौथा दिन – मां कूष्मांडा का मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की सृष्टि की थी, इसलिए इन्हें “ब्रह्मांड जननी” कहा जाता है।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

इस मंत्र के जाप से भक्त को उत्तम स्वास्थ्य, बल और ऊर्जा प्राप्त होती है। रोग और दुःख दूर होते हैं तथा जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

मां कूष्मांडा की आरती

जय कूष्मांडा माता, जय जय कूष्मांडा।
अष्टभुजा धारी माता, जय जय कूष्मांडा॥

तेरे रूप की महिमा न्यारी, करतीं सबका उद्धार।
सृष्टि की जननी माता, करतीं भक्तों का पार॥
जय कूष्मांडा माता, जय जय कूष्मांडा॥

हाथों में कमंडलु, धनुष, कमल और अमृत कलश।
तेरी पूजा से मिलता, हर संकट से निपटने का रस॥
जय कूष्मांडा माता, जय जय कूष्मांडा॥

सिंह पर विराजे माता, तेजस्विनी रूप।
भक्त जो करे ध्यान तेरा, मिटे जीवन का संताप स्वरूप॥
जय कूष्मांडा माता, जय जय कूष्मांडा॥

भक्तों की मनोकामना, तू ही पूरी करती।
श्रद्धा से जो तुझे पुकारे, उसकी नैया पार उतारती॥
जय कूष्मांडा माता, जय जय कूष्मांडा॥


पाँचवा दिन – मां स्कंदमाता का मंत्र

नवरात्रि के पाँचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। यह भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और इन्हें करुणा तथा मातृत्व का स्वरूप माना जाता है।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

इस मंत्र का जाप करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में प्रेम व सुख-शांति बनी रहती है।

मां स्कंदमाता की आरती

जय स्कंदमाता माता, जय जय स्कंदमाता।
पुत्र कार्तिकेय संग, विराजे सुहावन माता॥

कमल पर आसन धारी, करुणा का है रूप।
भक्तों के दुःख हरने को, करतीं कल्याण स्वरूप॥
जय स्कंदमाता माता, जय जय स्कंदमाता॥

चार भुजा में शोभित, कमल और कमंडलु।
सिंह पर सवारी करतीं, तेजमयी प्रतिपालु॥
जय स्कंदमाता माता, जय जय स्कंदमाता॥

भक्त जो तेरा ध्यान करें, जीवन पावन हो जाए।
संतानहीन जो नारी हो, उसे पुत्र रत्न मिल जाए॥
जय स्कंदमाता माता, जय जय स्कंदमाता॥

तेरी महिमा अपरंपार, जग में गाई जाती।
श्रद्धा से जो तुझे पुकारे, उसकी नैया पार लगाती॥
जय स्कंदमाता माता, जय जय स्कंदमाता॥


छठा दिन – मां कात्यायनी का मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह माँ दुर्गा का वीर और उग्र स्वरूप है, जिन्होंने महिषासुर का वध करके देवताओं को विजय दिलाई थी। अविवाहित कन्याओं के लिए मां कात्यायनी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

इस मंत्र के जाप से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में साहस व शक्ति का संचार होता है।

मां कात्यायनी की आरती

जय कात्यायनी माता, जय जय कात्यायनी।
असुरों का नाश करने वाली, महाशक्ति भवानी॥

सिंह पर सवारी करतीं, कर में त्रिशूल सुहाए।
तेरा स्मरण जो करता, सब दुख उसके मिट जाए॥
जय कात्यायनी माता, जय जय कात्यायनी॥

चार भुजाओं में शोभित, कमल और खड्ग।
भक्तों के संकट हरतीं, देतीं जीवन में आनंद॥
जय कात्यायनी माता, जय जय कात्यायनी॥

कन्या जो तेरा ध्यान करे, पावें वर मनचाहा।
तेरी कृपा से जीवन में, मिले सुख अथाह॥
जय कात्यायनी माता, जय जय कात्यायनी॥

तेरा रूप महान है, महिषासुर संहारी।
भक्तों के संकट हरने वाली, दयामयी नरसिंहवारी॥
जय कात्यायनी माता, जय जय कात्यायनी॥


सातवां दिन – मां कालरात्रि का मंत्र

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का उग्र रूप है जो अंधकार और भय का नाश करती हैं। इनके दर्शन मात्र से भक्त का भय मिट जाता है और वह साहस से भर जाता है।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

इस मंत्र का जाप करने से शत्रु, नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश होता है। साधक के जीवन में साहस और विजय की प्राप्ति होती है।

मां कालरात्रि की आरती

जय कालरात्रि माता, जय जय कालरात्रि।
भय हरने वाली माता, जय जय कालरात्रि॥

कृष्णवर्ण काया तेरा, केश खुले विकराल।
तेरी पूजा से मिट जाते, संकट भारी बेहाल॥
जय कालरात्रि माता, जय जय कालरात्रि॥

चार भुजा धारी रूप, कर में खड्ग सुहाए।
तेरा स्मरण जो करता, सब दुख उसके मिट जाए॥
जय कालरात्रि माता, जय जय कालरात्रि॥

सिंह पर विराजे माता, रूप तेरा भयकारी।
भक्तों की रक्षा करतीं, बनके जग उद्धारी॥
जय कालरात्रि माता, जय जय कालरात्रि॥

जो तेरा नाम जपते, हर संकट टल जाता।
तेरी कृपा से भक्त का, जीवन सुखमय बन जाता॥
जय कालरात्रि माता, जय जय कालरात्रि॥


आठवां दिन – मां महागौरी का मंत्र

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। इन्हें सौंदर्य, शांति और पवित्रता की देवी माना जाता है। मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत कोमल और दिव्य है।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी महागौर्यै नमः

इस मंत्र के जाप से भक्त को सौभाग्य, दांपत्य सुख और जीवन में पवित्रता की प्राप्ति होती है।

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी माता, जय जय महागौरी।
सौंदर्य की मूर्ति माता, जय जय महागौरी॥

श्वेत वस्त्र धारण किए, रूप तेरा है न्यारा।
करुणा बरसाती माता, करतीं संकट से उबारा॥
जय महागौरी माता, जय जय महागौरी॥

सिंह पर सवार हो, वरद अभय प्रदान करें।
भक्त जो तेरा ध्यान करें, जीवन पावन बनाएं॥
जय महागौरी माता, जय जय महागौरी॥

कर में त्रिशूल और डमरू, रूप तेरा मनोहर।
तेरी पूजा से मिट जाएं, पाप और संताप प्रबल॥
जय महागौरी माता, जय जय महागौरी॥

भक्तों की रक्षा करतीं, देतीं सुख अथाह।
श्रद्धा से जो नाम पुकारे, उसकी नैया पार लगाएं॥
जय महागौरी माता, जय जय महागौरी॥


नवां दिन – मां सिद्धिदात्री का मंत्र

नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह मां दुर्गा का अंतिम स्वरूप है और सभी सिद्धियों की दात्री मानी जाती हैं। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्त को आठों सिद्धियाँ और नौों निद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है –

मंत्र:
🔸 ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

इस मंत्र के जाप से भक्त को विद्या, सफलता, शक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं।

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री।
सिद्धियों की दात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री॥

कमल पर विराजे माता, रूप तेरा मनोहर।
तेरी कृपा से मिलता, सुख-शांति और वैभव अपार॥
जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री॥

चार भुजा धारी रूप, करुणा से भरपूर।
भक्तों के संकट हरतीं, करतीं जीवन निखार भरपूर॥
जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री॥

भक्त जो तेरा ध्यान करें, मनचाहा फल पाए।
सिद्धियाँ और निद्धियाँ, तेरी कृपा से घर आए॥
जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री॥

तेरी महिमा अपरंपार, जगत करे गुणगान।
श्रद्धा से जो तुझे पुकारे, उसके कटें सब क्लेश महान॥
जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री॥


Shardiya Navratri 2025 के नौ दिन भक्तों के लिए भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि के होते हैं। प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा विधि, मंत्र और आरती का अपना विशेष महत्व है। कोई रूप शक्ति का प्रतीक है, कोई ज्ञान का, कोई करुणा और मातृत्व का तो कोई भय का नाश करने वाला।

यदि भक्त पूरे श्रद्धा और नियम से इन नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करता है तो उसके जीवन से दुःख, रोग और संकट दूर हो जाते हैं। उसे सुख, शांति, समृद्धि और दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। शारदीय नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश भी देता है।

इसलिए नवरात्रि के दिनों में मन को शुद्ध कर, नियमपूर्वक व्रत-पूजन, मंत्र-जप और आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां दुर्गा की कृपा सदैव बनी रहती है।

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